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लखनऊ… निगम के 10 हजार सफाई कर्मचारियों के ईपीएफ का 80 करोड़ डकार गईं 30 निजी एजेंसियां, 150 कर्मचारियों की ग्रैज्युटी भी नहीं दी

लखनऊ… निगम के 10 हजार सफाई कर्मचारियों के ईपीएफ का 80 करोड़ डकार गईं 30 निजी एजेंसियां, 150 कर्मचारियों की ग्रैज्युटी भी नहीं दी
UP City News | Aug 13, 2022 12:00 PM IST

लखनऊ. लखनऊ नगर निगम में 80 करोड़ का ईपीएफ घोटाला सामने आने के बाद भविष्य निधि संगठन ने जांच शुरू कर दी है. ईपीएफओ ने नगर निगम से मामले से जुड़े दस्तावेज मांगे थे, जब पूरे कागजात नहीं मिले तो ईपीएफओ की टीम खुद ही निगम दफ्तर जांच के लिए पहुंच गई. जानकारी के अनुसार निगम में काम करने वाली 30 एजेंसियों ने 10 हजार सफाई कर्मचारियों के पीएफ का घोटाला किया है. इन सभी एजेंसियों को नोटिस भेजा गया है. निगम से ईपीएफ और ईएसआई की रकम लेने के बावजूद एजेंसियों ने कर्मचारियों के खातों में रकम जमा नहीं कराई और इसे खुद ही डकार गए. इनमें 150 कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी ग्रैज्युटी भी नहीं मिली है.

नगर निगम निजी कंपनियों को हर महीने 1502.31 रुपए प्रति कर्मचारी के हिसाब से पैसे का भुगतान कर रहा था, 1178 रुपए निजी संस्थाए कर्मचारियों के मानदेय से काट रहीं थी. इन दोनों रकमों को ईपीएफ खाते में हर महीने जमा करना होता है जिस पर ईपीएफओ ब्याज भी देता है. मगर निजी कंपनियों ने सांठगांठ करके इस पैसो को जमा ही नहीं कराया और खुद हड़प लिया. 10 हजार कर्मचारियों का एक साल का करीब 32 करोड़ रुपए बनता है, जबकि 2 सालों का 64.32 करोड़ रुपए बनता है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर ठीक से जांच कर्रा जाए तो घोटाला की रकम बढ़कर 200 करोड़ से भी अधिक जाएगी.

निगम 308 रुपए देता है मानदेय
निगम में करीब 10 हजार सफाई कर्मी हैं, जिनमें नगर निगम 308 रुपए रोजाना मानदेय के रूप में देता है. इस हिसाब से सफाई कर्मियों के महीने में 9245 रुपए बनते हैं. इसके अलावा निगम हर कर्मचारी के लिए 13% ईपीएफ और 3.25% ईएसआई की रकम भी देता है. इसके अलावा निजी एजेंसियां खुद की तरफ से 12% ईपीएफ तथा 0.75 प्रतिशत ईएसआई देनी होती है। निजी एजेंसियां कर्मचारियों के खाते से इसके लिए 1178 रुपए काटती हैं और कर्मचारियों को महीने मे महज 8067 रुपए ही मिलते हैं. मगर हर महीने के उनके 2680.31 रुपए जमा ही नहीं कराए जाते हैं. जिस पर मिलने वाले ब्याज से भी सफाई मुलाजिम वंचित हैं.