सिटी न्यूज़

स्वामी प्रसाद मौर्य की उस हार में छिपी थी 'जीत', फिर आया वो मोड़ और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा

स्वामी प्रसाद मौर्य की उस हार में छिपी थी 'जीत', फिर आया वो मोड़ और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा
UP City News | Jan 12, 2022 11:56 AM IST

गोरखपुर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की भाजपा (BJP) नेतृत्व वाली सरकार (UP Government) में पांच साल श्रम एवं सेवायोजन मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने मंगलवार को इस्तीफा और फिर सपा ज्वाइन कर प्रदेश की राजनीति में सियासी भूचाल ला दिया. स्वामी प्रसाद मौर्य पूर्वी यूपी के कुशीनगर जिले की पडरौना सीट से लगातार तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं. दो बार वो बसपा के टिकट पर जीते और एक बार उन्होंने भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की और फिर मंत्री बने. इस वक्त वो कुशीनगर की राजनीति का केंद्र हैं, लेकिन कभी ऐसा मौका भी था कि वो चुनाव हार गए थे, लेकिन शायद यही हार ही उन्होंने ऐसी जीत दी कि वो प्रदेश की सियासत में खूब चमके.

बात वर्ष 2009 की है. जब बसपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़े, लेकिन 20 हजार वोटों के अंतर से हार गए. इसी वर्ष स्वामी प्रसाद मौर्या ने विधानसभा का उपचुनाव लड़ा और बड़े अंतर से जीत हासिल की. यह सिलसिला पिछले 13 वर्षों से जारी है. बताया जा रहा है कि बसपा सरकार में स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने हिसाब से काम किया था, लेकिन यह आजादी भाजपा सरकार में नहीं मिली, उनके बयान भी कुछ इसी ओर इशारा कर रहे हैं. बात वर्ष 2008 की है, रामकोला में बसपा की महारैली हो रही थी. तब तत्कालीन मुख्यमंत्री व बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंच से कहा कि ‘कुशीनगर जिले का उनकी सरकार में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. वे अपने सबसे विश्वासपात्र व प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्या को यहीं छोड़कर जा रही हैं.

स्वामी प्रसाद के इस्तीफे पर डिप्टी सीएम केशव मौर्य का ट्विट, कहा- जल्दबाजी में लिये हुये फैसले अक्सर गलत साबित होते हैं

इस रैली के कुछ दिनों बाद वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव का बिगुल बजा और बसपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्या को कुशीनगर लोकसभा सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया. कांग्रेस के आरपीएन सिंह ने स्वामी प्रसाद मौर्या को करीब
20 हजार वोट के अंतर से हरा दिया. पडरौना से विधायक रहे आरपीएन सिंह चुनाव जीतकर सांसद बन गए, लिहाजा उपचुनाव हुआ. तब प्रदेश के 38 मंत्रियों ने यहां डेरा डाल दिया. पहली बार पडरौना से बसपा का खाता खुला और स्वामी प्रसाद मौर्या बड़े अंतर से चुनाव जीत गए. बसपा सरकार में सहकारिता मंत्री बने. वर्ष 2012 में भी वे इस सीट से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए और नेता प्रतिपक्ष बन गए. वर्ष 2017 में मायावती से खटपट के बाद वे भाजपा में आए और पडरौना से ही लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए.