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आखिर लोग क्यों कर रहे हैं सुसाइड, NCRB के आंकडों पर आधारित रिपोर्ट से समझें

आखिर लोग क्यों कर रहे हैं सुसाइड, NCRB के आंकडों पर आधारित रिपोर्ट से समझें
UP City News | Nov 24, 2022 09:21 AM IST

गोरखपुर. गोरखपुर (Gorakhpur News) की तो पिछले एक सप्ताह में कई ऐसी घटनाए हुई हैं जिससे दिल दहल उठा है. पुलिस महकमा खुद ऐसे मामलों में सामाजिक जागरूकता, आर्थिक रूप से मजबूत लोगों की समिति बनाने पर जोर देने जा रही है तो सूदखोरों पर भी नकेल कसने की तैयारी में है. मनोवैज्ञानिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का मानना है सोसाइटी में ऐसे प्लेटफार्म होने चाहिए जहां पर लोग खुले तौर पर अपनी बातों को रख सकें और आत्महत्या जैसी घटनाओं से खुद को और अपने परिवार को बचा सके.

एनसीआरबी के वर्ष 2021 के आंकड़े में कुल 5932 आत्महत्या (Suicide News) के मामले दर्ज थे, जिसको 1 वर्ष के तुलनात्मक आधार पर देखा जाए तो प्रतिदिन यह आंकड़ा 16 आत्महत्याओं का जाता है. इस आंकड़े पर चर्चा गोरखपुर से इसलिए करना जरूरी हुआ क्योंकि बीते 10 दिनों में यहां लगातार और हैरान कर देने वाली आत्महत्या की घटना घटी और उसके पीछे जो कारण निकल कर के आए वह आर्थिक तंगी तनाव सूदखोरों का दबाव बना हुआ था. जहां एक पिता अपनी दो नाबालिग बेटियों के साथ फांसी के फंदे से लटककर सुसाइड कर लिया. वहीं सूदखोरों के दबाव में एक मां अपने होनहार बेटे के साथ खुदकुशी कर ली.

बहू भी पारिवारिक कला की वजह से घर में ही फंदा लगाकर अपनी जान दे दिया. एनसीआरबी के आंकड़े भी कह रहे हैं कि सर्वाधिक 33% लोग फैमिली प्रॉब्लम की वजह से मौत को गले लगा रहे हैं तो वहीं लंबी बीमारी और इलाज का खर्च भी सुसाइड का कारण बन रहा है. ग्रुप में कुछ मामलों की चर्चा करें तो 9 जून को औद्योगिक क्षेत्र में एक युवक ने सुसाइड किया था तो 10 जून को बांसगांव में 1 लोग ने सुसाइड किया 6 जून को भी इसी थाना क्षेत्र में घटना घटी गोला थाना क्षेत्र में भी 6 जून को सुसाइड का मामला सामने आया.

7 जून को सिकरीगंज में युवक ने सुसाइड किया 11 जून को गुलरिया मैं 85 साल के बसंत सिंह ने सुसाइड कर लिया था. हैरानी की बात है कि 14 जून को तो एक युवक गिड़ा थाना क्षेत्र में हाईटेंशन के तार से झूल कर अपनी जीवन लीला समाप्त की थी. एनसीआरबी के वर्ष 2021 के आंकड़े 5932 जो सुसाइड के हैं. उसमें देखा जाए तो पारिवारिक कारण आत्महत्या का 33% रहा तो बीमारी ने भी करीब 19% लोगों को आत्महत्या करने पर मजबूर किया. करीब 18 फीसद कैसे थे जिसमें कारण नहीं पता चल सका नपुंसकता की वजह से भी लोगों ने आत्महत्या किया.

परीक्षा में फेल होने अवैध संबंध और चरित्र पर दाग लगने जैसी घटनाओं में भी लोगों ने आत्महत्या की संपत्ति विवाद गरीबी सगे संबंधी की मौत और कैरियर में होने वाली प्रॉब्लम भी आत्महत्या का कारण बन कर सामने आई है. बेरोजगारी आर्थिक तंगी लव अफेयर और शादी से जुड़ी समस्याएं भी लोगों को आत्महत्या करने पर मजबूर की है तो वही नशे की लत में आकर करीब क्षेत्र में 4% लोग आत्महत्या करने पर मजबूर हुए हैं. गोरखपुर में भी आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पुलिस मास्टर प्लान बनाने में जुटी है एसपी सिटी कृष्णा विश्नोई की माने तो आर्थिक तंगी सूदखोरों की समस्या सिद्धू जाने वाले लोगों के साथ अन्य किसी भी तरह की घटना जो आत्महत्या का कारण बन रही है.

उससे दूसरे लोगों को एक हेल्पलाइन की सुविधा प्रदान की जाएगी जिससे उनकी समस्या का निर्माण हो सके साथ ही समाज के आर्थिक रूप से मजबूत लोगों को भी जोड़ने का प्रयास किया जाएगा जो जरूरतमंदों को मदद कर उन्हें उनकी समस्या सुधार सकें गोरखपुर विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ अनुभूति दुबे इस विषय पर कहते हैं कि मोबाइल और कंप्यूटर के युग में लो सारा समय सोशल मीडिया पर दे रहे हैं.

उन्हें बाहर की दुनिया से कोई मतलब नहीं है कानूनी वाले में लोग एक दूसरे से बात करने से कतरा रहे हैं परिवार भी एक दूसरे को टाइम नहीं दे रहा है. साथ ही एकल परिवार बढ़ें हैं. आभासी दुनिया की तरफ अट्रैक्ट लोग ज्यादा हो रहे हैं और इसी में वह समस्या का शिकार हो रहे हैं जिसका उन्हें निदान नहीं मिलता तो उनके मन में नकारात्मक विचार उत्पन्न होने लगता है. ऐसे में लोगों को अपने नजदीकी लोगों से समस्याओं विचारों को शेयर करना चाहिए. जो आत्महत्या जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में कामयाब होगा.

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