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आज का इतिहास: जानिए 1950 में से पहले उत्तर प्रदेश का नाम क्या था और क्यों इसे बदला गया

आज का इतिहास: जानिए 1950 में से पहले उत्तर प्रदेश का नाम क्या था और क्यों इसे बदला गया
UP City News | Jan 12, 2022 07:56 AM IST

नई दिल्ली. इतिहास के पन्नों को पलटेंगे तो कई ऐसी रोचक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आएंगे जिन्हें पहले कभी नहीं जानते थे. 12 जनवरी को पूरी दुनिया में बेहद खास घटनाएं घटी जिन्हें जानना हर नागरिक के लिए जरूरी है. बहुत सी घटनाएं बेहद सुखुद रहीं तो बहुत से हादसों में पूरे विश्व को हिलाकर रख दिया. यूपी सिटी आपको 12 जनवरी के इतिहास को आपके सामने रखने जा उत्तर प्रदेश का भारतीय एवं हिन्दू धर्म के इतिहास मे अहम योगदान रहा है. उत्तर प्रदेश आधुनिक भारत के इतिहास और राजनीति का केन्द्र बिन्दु रहा है और यहाँ के निवासियों ने भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में प्रमुख भूमिका निभाई.
उत्तर प्रदेश का इतिहास: प्रागैतिहासिक एवं पूर्ववैदिक काल
उत्तर प्रदेश का ज्ञात इतिहास लगभग 4000 वर्ष पुराना है. यह आर्यावर्त का प्रमुख भाग था. रामायण में वर्णित तथा हिन्दुओं के एक मुख्य भगवान "भगवान राम" का प्राचीन राज्य कौशल इसी क्षेत्र में था, अयोध्या इस राज्य की राजधानी थी. हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान विष्णु के आठवे अवतार भगवान कृष्ण का जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर में हुआ था. संसार के प्राचीनतम शहरों में एक माना जाने वाला वाराणसी शहर भी यहीं पर स्थित है. वाराणसी के पास स्थित सारनाथ का चौखन्डी स्तूप भगवान बुद्ध के प्रथम प्रवचन की याद दिलाता है.समय के साथ यह क्षेत्र छोटे-छोटे राज्यों में बँट गया या फिर बड़े साम्राज्यों, गुप्त, मौर्य और कुषाण के शासन का अंग रहा. ७वी शताब्दी में कन्नौज गुप्त साम्राज्य का प्रमुख केन्द्र था.
बौद्ध काल
सातवीं शताब्दी ई. पू. के अन्त से भारत और उत्तर प्रदेश का व्यवस्थित इतिहास आरम्भ होता है, जब उत्तरी भारत में 16 महाजनपद श्रेष्ठता की दौड़ में शामिल थे, इनमें से सात वर्तमान उत्तर प्रदेश की सीमा के अंतर्गत थे. बुद्ध ने अपना पहला उपदेश वाराणसी (बनारस) के निकट सारनाथ में दिया और एक ऐसे धर्म की नींव रखी, जो न केवल भारत में, बल्कि चीन व जापान जैसे सुदूर देशों तक भी फैला. कहा जाता है कि बुद्ध को कुशीनगर में परिनिर्वाण (शरीर से मुक्त होने पर आत्मा की मुक्ति) प्राप्त हुआ था, जो पूर्वी ज़िले देवरिया में स्थित है. पांचवीं शताब्दी ई. पू. से छठी शताब्दी ई. तक उत्तर प्रदेश अपनी वर्तमान सीमा से बाहर केन्द्रित शक्तियों के नियंत्रण में रहा, पहले मगध, जो वर्तमान बिहार राज्य में स्थित था और बाद में उज्जैन, जो वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है. इस राज्य पर शासन कर चुके इस काल के महान शासकों में चन्द्रगुप्त प्रथम (शासनकाल लगभग 330-380 ई.) व अशोक (शासनकाल लगभग 268 या 265-238), जो मौर्य सम्राट थे और समुद्रगुप्त (लगभग 330-380 ई.) और चन्द्रगुप्त द्वितीय हैं (लगभग 380-415 ई., जिन्हें कुछ विद्वान विक्रमादित्य मानते हैं). एक अन्य प्रसिद्ध शासक हर्षवर्धन (शासनकाल 606-647) थे. जिन्होंने कान्यकुब्ज (आधुनिक कन्नौज के निकट) स्थित अपनी राजधानी से समूचे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब और राजस्थानके कुछ हिस्सों पर शासन किया.
इस काल के दौरान बौद्ध संस्कृति का उत्कर्ष हुआ. अशोक के शासनकाल के दौरान बौद्ध कला के स्थापत्य व वास्तुशिल्प प्रतीक अपने चरम पर पहुँचे. गुप्त काल (लगभग 320-550) के दौरान हिन्दू कला का भी अधिकतम विकास हुआ. लगभग 647 ई. में हर्ष की मृत्यु के बाद हिन्दूवाद के पुनरुत्थान के साथ ही बौद्ध धर्म का धीरे-धीरे पतन हो गया. इस पुनरुत्थान के प्रमुख रचयिता दक्षिण भारतमें जन्मे शंकर थे, जो वाराणसी पहुँचे, उन्होंने उत्तर प्रदेश के मैदानों की यात्रा की और हिमालय में बद्रीनाथ में प्रसिद्ध मन्दिरकी स्थापना की. इसे हिन्दू मतावलम्बी चौथा एवं अन्तिम मठ (हिन्दू संस्कृति का केन्द्र) मानते हैं.
मुस्लिम काल
इस क्षेत्र में हालांकि 1000-1030 ई. तक मुसलमानों का आगमन हो चुका था, लेकिन उत्तरी भारत में 12वीं शताब्दी के अन्तिम दशक के बाद ही मुस्लिम शासन स्थापित हुआ, जब मुहम्मद ग़ोरी ने गहड़वालों (जिनका उत्तर प्रदेश पर शासन था) और अन्य प्रतिस्पर्धी वंशों को हराया था. लगभग 600 वर्षों तक अधिकांश भारत की तरह उत्तर प्रदेश पर भी किसी न किसी मुस्लिम वंश का शासन रहा, जिनका केन्द्र दिल्ली या उसके आसपास था. 1526 ई. में बाबर ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी को हराया और सर्वाधिक सफल मुस्लिम वंश, मुग़ल वंश की नींव रखी. इस साम्राज्य ने 200 वर्षों से भी अधिक समय तक उपमहाद्वीप पर शासन किया. इस साम्राज्य का महानतम काल अकबर (शासनकाल 1556-1605 ई.) का काल था, जिन्होंने आगरा के पास नई शाही राजधानी फ़तेहपुर सीकरी का निर्माण किया. उनके पोते शाहजहां (शासनकाल 1628-1658 ई.) ने आगरा में ताजमहल (अपनी बेगम की याद में बनवाया गया मक़बरा.
उत्तर प्रदेश में केन्द्रित मुग़ल साम्राज्य ने एक नई मिश्रित संस्कृति के विकास को प्रोत्साहित किया. अकबर इसके महानतम प्रतिपादक थे, जिन्होंने बिना किसी भेदभाव के अपने दरबार में वास्तुशिल्प, साहित्य, चित्रकला और संगीत विशेषज्ञों को नियुक्त किया था. हिन्दुत्व और इस्लाम के टकराव ने कई नए मतों का विकास किया, जो इन दोनों और भारत की विभिन्न जातियों के बीच आम सहमति क़ायम करना चाहते थे. भक्ति आन्दोलन के संस्थापक रामानन्द (लगभग 1400-1470 ई.), जिनका दावा था कि, मुक्ति लिंग या जाति पर आश्रित नहीं है और सभी धर्मों के बीच अनिवार्य एकता की शिक्षा देने वाले कबीर ने उत्तर प्रदेश में मौजूद धार्मिक सहिष्णुता के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई केन्द्रित की. 18वीं शताब्दी में मुग़लों के पतन के साथ ही इस मिश्रित संस्कृति का केन्द्र दिल्ली से लखनऊ चला गया, जो अवध (औध, वर्तमान अयोध्या) के नवाब के अन्तर्गत था और जहाँ साम्प्रदायिक सदभाव के माहौल में कला, साहित्य, संगीत और काव्य का उत्कर्ष हुआ.
ब्रिटिश काल
लगभग 75 वर्ष की अवधि में वर्तमान उत्तर प्रदेश के क्षेत्र का ईस्ट इण्डिया कम्पनी (ब्रिटिश व्यापारिक कम्पनी) ने धीरे-धीरे अधिग्रहण किया. विभिन्न उत्तर भारतीय वंशों 1775, 1798 और 1801 में नवाबों, 1803 में सिंधिया और 1816 में गोरखों से छीने गए प्रदेशों को पहले बंगाल प्रेज़िडेन्सी के अन्तर्गत रखा गया, लेकिन 1833 में इन्हें अलग करके पश्चिमोत्तर प्रान्त (आरम्भ में आगरा प्रेज़िडेन्सी कहलाता था) गठित किया गया. 1856 ई. में कम्पनी ने अवध पर अधिकार कर लिया और आगरा एवं अवध संयुक्त प्रान्त (वर्तमान उत्तर प्रदेश की सीमा के समरूप) के नाम से इसे 1877 ई. में पश्चिमोत्तर प्रान्त में मिला लिया गया. 1902 ई. में इसका नाम बदलकर संयुक्त प्रान्त कर दिया गया.
12 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
-छत्रपति शाहू जी को 1708 में मराठा शासक का ताज पहनाया गया.
-ब्रिटेन ने पश्चिम बंगाल के बंदेल प्रांत को 1757 में पुर्तग़ाल से अपने कब्जे में लिया.
-लंदन में रॉयल एयरोनॉटिकल सोसायटी का 1866 में गठन हुआ.
-पेरिस स्थित एफिल टॉवर से 1908 में पहली बार लंबी दूरी का वायरलेस संदेश भेजा गया.
-भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रान्तिकारी सूर्य सेन को 1934 में चटगांव में फांसी दी गयी। उन्होने इंडियन रिपब्लिकन -आर्मी की स्थापना की और चटगांव विद्रोह का सफल नेतृत्व किया.
-1948 में महात्मा गांधी ने अपना अंतिम भाषण दिया और सांप्रदायिक हिंसा के विरुद्ध अनशन में बैठने का फैसला किया.
-1950 में ‘संयुक्त प्रांत’ का नाम बदल कर ‘उत्तर प्रदेश’ रखा गया.
-भारत के पूर्व गेंदबाज बापू नाडकर्णी ने 1964 में मद्रास में इंग्लैंड के साथ पहले टेस्ट में लगातार 21 ओवर मेडन फेंके. छह गेदों के ओवर के इतिहास में यह अब तक रिकॉर्ड है.
-जांजीबार विद्रोहियों ने क्रांति की शुरुआत और गणतंत्र की घोषणा 1964 में की.
-स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन के मौके पर 1984 से हर वर्ष देश में इस दिवस को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ मनाने की घोषणा की गयी.
-रोमानिया ने कम्युनिस्ट पार्टी पर 1990 में प्रतिबंध लगाया.
-अमरीकी संसद ने 1991 में कुवैत में इराक के खिलाफ सैनिक कार्रवाई की मंजूरी दीv
-यूरोप के 19 देश मानव क्लोनिंग पर प्रतिबंधित लगाने पर 1998 में सहमत हुए.
-भारतीय मूल की महिला लिंडा बाबूलाल त्रिनिदाद 2003 में संसद की अध्यक्ष बनीं.
-2007 में आयी आमिर खान की फ़िल्म ‘रंग दे बसन्ती’ बाफ़्टा के लिए नामांकित.
-2009 में प्रसिद्ध संगीतकार ए. आर. रहमान प्रतिष्ठित गोल्डन ग्लोब अवार्ड जीतने वाले पहले भारतीय बने.
-इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. जयन्त कुमार ने 2009 में दुनिया का सबसे पुराना उल्का पिंड क्रेटर खोजा.
-हैती में आए 2010 के भूकंप में 2,00,000 से ज्यादा लोग मारे गए। इसमें शहर का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया.
12 जनवरी को जन्मे व्यक्ति
-राजमाता जीजाबाई का जन्म 1598 को महाराष्ट्र के बुलढ़ाणा शहर में हुआ.
-भारतीय दार्शनिक स्वामी विवेकानंद का जन्म 1863 को कोलकाता में हुआ.
-भारत रत्न से सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी, समाज सेवी और शिक्षा शास्त्री भगवान दास का जन्म 1869 को वाराणसी में हुआ.
-अमरीकी लेखक जैक लंदन का जन्म 1876 को अमेरिका के कैलीफोर्निया में हुआ.
-प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारी नेली सेनगुप्ता का जन्म 1886 को कैम्ब्रिज, इंग्लैण्ड में हुआ.
-भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ बद्रीनाथ प्रसाद का जन्म 1899 को आजमगढ़ जिले के मुहम्मदाबाद गोहना गाव में हुआ.
-भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन’ के पुरोधा उमाशंकर दीक्षित का जन्म 1901 को ‎ उत्तर प्रदेश के उन्नाव शहर में हुआ.
-भारतीय अध्यात्मवादी महर्षि महेश योगी का जन्म 1917 को जबलपूर शहर में हुआ.
-हिन्दी फ़िल्म निर्माता-निर्देशक, गायक और संगीतकार सी. रामचन्द्र का जन्म 1918 को महाराष्ट्र के अहमदनगर में हुआ.
-प्रसिद्ध उर्दू कवि अहमद फ़राज़ का जन्म 1931 में हुआ.
-भारतीय राजनीतिज्ञ अजय माकन का जन्म 1964 को दिल्ली में हुआ.
-राजनीतिज्ञ तथा उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा का जन्म 1964 को लखनऊ शहर में हुआ.
-पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बेटी प्रियंका गांधी का जन्म 1972 को दिल्ली में हुआ.
12 जनवरी को हुए निधन
-1665 में फ़्रांस के गणितज्ञ पियरडी फ़रमा का निधन हुआ.
-1924 में पश्चिम बंगाल के स्वतंत्रता सेनानी गोपीनाथ साहा का निधन हुआ.
-1934 में भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले प्रसिद्ध क्रांतिकारी सूर्य सेन का निधन हुआ.
-1941 में भारतीय क्रांतिकारियों में से एक प्यारे लाल शर्मा का निधन हुआ.
-1976 में दुनिया के सबसे जाने माने जासूसी उपन्यासकारों में से एक अगाथा क्रिस्टी का निधन हुआ.
-1992 में भारत के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक कुमार गंधर्व का निधन हुआ.
-2005 में भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता और खलनायक अमरीश पुरी का निधन हुआ.
-2008 में विश्व के सबसे बड़े फ़िल्म शो टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव की बुनियाद रखने वाले ‘मुर्रे दस्ती कोहल’ का निधन हुआ.
12 जनवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव