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चुनावी हार के रिकॉर्ड की ओर बढ़ते हसनुराम आंबेडकरी, पार्षद से लेकर राष्ट्रपति तक के लिए भर चुके हैं पर्चा

चुनावी हार के रिकॉर्ड की ओर बढ़ते हसनुराम आंबेडकरी, पार्षद से लेकर राष्ट्रपति तक के लिए भर चुके हैं पर्चा
UP City News | Jan 14, 2022 02:20 PM IST

आगरा. यूपी में आगरा के खेरागढ़ तहसील के नगला दूल्हा में रहने वाले हसनुराम आंबेडकरी के नाम एक रिकॉर्ड दर्ज है. यह रिकॉर्ड चुनाव हारने का है. हसनुराम आंबेडकरी ने 93 बार पार्षद से लेकर राष्ट्रपति पद के लिए पर्चा दाखिल कर चुके हैं. भले ही वह चुनाव ना जीत सके हों, लेकिन इस बात का उनको जरा भी मलाल नहीं है. अब उनकी मंशा 100 बार चुनाव में हारकर रिकॉर्ड बनाने की है. जिसके लिए उनकी नजरें यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी टिकी है. हसनुराम आंबेडकरी के इतने चुनाव लड़ने के पीछे एक बड़ी दिलचस्प कहानी है.

राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी दे चुके हैं आवेदन

हसनुराम आंबेडकरी वर्ष 2019 में फतेहपुर सीकरी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. जब उन्हें लगभग 42000 वोट हासिल हुए थे. इसके बाद में यूपी में हुए पंचायत चुनाव के लिए भी मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्हें फिर से हार का सामना करना पड़ा. उन्होंने तभी कहा था कि अगर 2022 तक वह सही सलामत रहते हैं तो विधानसभा चुनाव भी लड़ेंगे.

बसपा के नेता ने हसनुराम आंबेडकरी से की थी कड़वी बात

तुम्हें तुम्हारी बीवी तक नहीं पहचानती है, तो कोई और क्या वोट देगा. यह शब्द हसनुराम आंबेडकरी के दिल में चुब गए और हसनुराम आंबेडकरी बताते हैं 1985 में जब मेंने बसपा नेता से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट मांगी थी, तो उन्होंने यह शब्द मुझसे कहे. इसके बाद 1988 में खैरागढ़ से विधानसभा का चुनाव लड़ा. हसनुराम आंबेडकरी तब से आज तक चुनाव हार ही रहे हैं. और अपनी किस्मत को लगातार आजमा रहे हैं. लेकिन आज तक एक भी चुनाव जीत नहीं पाए. उन्हें इसका ना तो कोई मलाल है और ना ही इससे उनके हौसले पस्त हुए हैं, बल्कि वह एक बार फिर यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं.

चुनाव के लिए त्यागी सरकारी नौकरी

हसनुराम आंबेडकरी राजस्व विभाग में आमीन के पद पर काम करते थे. उस समय वह वामफेस में सक्रिय थे. साल 1985 में उन्हें क्षेत्रीय दल की ओर से विधानसभा चुनाव लड़ाने का भी भरोसा दिया गया. उनसे कहा कि वह अपनी नौकरी छोड़कर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट जाएं. आश्वासन पर उन्होंने अपनी नौकरी से भी इस्तीफा दे दिया. मगर चुनाव के समय पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया.