सिटी न्यूज़

मथुराः जांच रिपोर्ट के बाद भी मुकदमा दर्ज करने के नहीं दिए आदेश, .चार्ज पर बने हैं दोषी निरीक्षक

मथुराः जांच रिपोर्ट के बाद भी मुकदमा दर्ज करने के नहीं दिए आदेश, .चार्ज पर बने हैं दोषी निरीक्षक
UP City News | Sep 17, 2022 08:25 AM IST

मथुरा.फर्जी मुकदमे में फंसा कर दो लोगों को जेल भेजने वाले पुलिस कर्मियों को जांच रिपोर्ट में दोषी ठहराये जाने के बावजूद अभी तक उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है. पीड़ित दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाने से लेकर एसएसपी तक को प्रार्थना पत्र देता रहा, लेकिन उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई. जांच में दोषी पाए जा चुके दोषी जनपद और उसके बाहर के थानों में तैनात हैं. पीड़ित ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए एससी एसटी कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है.

बिरजापुर थाना हाईवे निवासी पुनीत और कासगंज निवासी चेतन को फर्जी तरीके से गिरफ्तार कर जेल भेजने के मामले में आरोपी पुलिस कर्मी अभी तक बचे हुए हैं. भाई पुनीत को बे-गुनाह साबित करने के लिए लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने वाले उसके बड़े भाई सुमित ने बताया कि पुलिस कर्मियों की कारगुजारी के पर्याप्त साक्ष्य उसके पास मौजूद होने के बाद भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उसकी एक नहीं सुनी. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के निर्देश पर विशेष जांच मुख्यालय लखनऊ के अपर पुलिस अधीक्षक प्रेम चन्द्र द्वारा जांच की गई. जांच में पुलिस विभाग के 35 पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया. जांच रिपोर्ट के आधार पर उसने सभी दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए 14 मई 2022 को थाना हाईवे में प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई. इसके बाद वह तमाम बार मेल कर चुका, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को पत्र लिख चुका लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई. पुलिस से कोई मदद नहीं मिलती देख उसने कोर्ट के माध्यम से जांच में दोषी ठहराए गए 35 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का मन बनाया. उसने 17 अगस्त 2022 को 156-3 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए एसएसी एसटी कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया. कोर्ट ने उसके प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए सम्बंधित थाने से आख्या मांगी। सुमित ने बताया कि थाने की आख्या कोर्ट पहुंच गई है. अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 26 सितंबर की तिथि निर्धारित की है.सुमित ने बताया कि उसे भरोसा है कि कोर्ट में उसके साथ न्याय होगा.

जांच में दोषी फिर भी हैं चार्ज पर
अनूसूचित जाति के व्यक्ति को फर्जी मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजने के बाद राष्ट्री अनुसूचित जाति आयोग के निर्देश पर विशेष जांच मुख्यालय लखनऊ के अपर पुलिस अधीक्षक प्रेम चन्द्र की जांच में दोषी कई पुलिस अधिकारी जनपद और दूसरे जनपदों में अभी भी चार्ज पर बने हुए हैं. जानकारों का कहना है कि नियमानुसार किसी भी जांच में दोषी ठहराए जाने के बाद वरिष्ठ अधिकारी किसी भी दोषी को चार्ज नहीं दे सकते हैं.

कसाना का विवादों से है पुराना नाता
वर्तमान में गोवर्धन थाने के प्रभारी निरीक्षक नितिन कसाना का विवादों से पुराना नाता रहा है. वर्ष 2001-02 बैच के उप निरीक्षक नितिन कसाना की पहली पोस्टिंग जनपद में हुई थी. जब वह वृंदावन कोतवाली में बतौर उप निरीक्षक तैनात थे तब एक विदेशी महिला से हुए विवाद को लेकर वह काफी चर्चा में रहे थे. दो दशक के बाद फिर नितिन कसाना जांच में दोषी ठहराए गए हैं.

सीबीआई जांच पर टिकी है निगाहें
हाईकोर्ट ने फजी तरीके से जेल भेजने के प्रकरण और पीड़ित के परिवार के खिलाफ फिरोजाबाद में दर्ज हुए दुराचार के मुकदमें की जांच सीबीआई से कराए जाने के आदेश दिए हैं. हालांकि सीबीआई ने अभी इस मामले की जांच शुरू नहीं की है. पीड़ित सुमित ने बताया कि आने वाले कुछ दिनों में सीबीआई अपनी जांच शुरू कर सकती है. सीबीआई की जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. सुमित ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश की सत्यापित प्रतिलिपि हमें मिल गई है. शनिवार को अधिवक्ता के माध्यम से आदेश की कॉपी फिरोजाबाद कोर्ट में जमा करेंगे.

लम्बे समय बाद मिले तीनों भाई
पुलिस के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने वाले सुमित ने बताया कि पुलिस ने उनके परिवार पर इतना दबाव बना दिया था कि पूरे परिवार को अपना घर छोड़ना पड़ गया था. सुमित ने बताया कि बड़े भाई दीपेन्द्र जो यूपी पुलिस में हैं, उनके, मां और खुद उनके खिलाफ फिरोजाबाद में मुकदमा पंजीकृत हो गया. इसके बाद पुलिस की दबिशों का सिलसिला शुरू हुआ. पुलिस से बचने के लिए वह सभी यहां-वहां छिपते रहे. पुलिस के डर से उन्होंने अपने फोन भी बंद कर लिए थे. हाईकोर्ट के आदेश से राहत मिली है.करीब चार माह बाद वे तीनों भाई आपस में मिले हैं.